सोनागाछी कोलकाता की बदनाम गलिया #Sonagachi

कोलकाता : कोलकाता की वह गालिया जिसे दुनिया सोनागाछी के नाम से जानती है , युथ को कोलकाता के नाम सुनते ही सबसे पहले “सोनागाछी ” का ही नाम पहले  आता है, हलाकि वहा पे और भी लोकप्रिय प्लेस है लेकिन उनको सबसे पहले ये नाम याद क्यू आता है।  आज इसके बारे में जानने की कोर्सिस करेंगे। She netflix

  • आखिर इस क्षेत्र में है क्या ?
  • इसका Starting History  क्या है ?
  • Sonagachi का मतलब होता क्या है ?
  • इस इलाका का नाम सोनगाछी (Sonagachi ) परा क्यू ?
  • क्या इस इलाका सोना के पेर जैसा कुछ है क्या ?

#आखिर इस area में है क्या ?

सोनागाछी के इस विरोधाभास को फिल्म चांदी की दीवार के एक गीत में नगमा निगार साहिर लुधियानवी ने बड़े दर्द के साथ पेश किया हैं, इस रचना में दुनिया से उनकी शिकायत है, मोहम्मद रफी इस गीत को जब स्वर देते हैं तो सोनागाछी अपनी रौ में अपनी पहचान के साथ सामने आ जाता है।

ये दुनिया दो रंगी है
एक तरफ से रेशम ओढ़े, एक तरफ से नंगी है
एक तरफ अंधी दौलत की पागल ऐश परस्ती
एक तरफ जिस्मों की कीमत रोटी से भी सस्ती
एक तरफ है सोनागाछी, एक तरफ चौरंगी है
ये दुनिया दो रंगी है

हुगली नदी के तट पे 300 पुराना शहर बसा हुआ है जिसका नाम कोलकाता है ये बहुत चीज़ो के लिए फेमस है रसगुल्ला, हिल्सा मछली, गीत संगीत फिल्म इत्यादि। लेकिन कोलकाता से जुड़ी  एक और फेमस चीज़ है। जिसका नाम दबी जुबान से लिया जाता है।  कोने में, यार दोस्त की महफ़िलो में, ये नाम है sonagachi. इसे दबी जुबान से इस लिया जाता है क्यू की ये red light area है। क्यू की लाल रंग जीबन में खतरा का संकेत देता है। हमें रुकने और सोचने का इशारा करता है। 

SonaGachi Image


“Sonagachi” Asia का सबसे बड़ा  देह बिज़नेस केंद्र। एक सर्वे के अनुसार यहां पे 16000 से ज्यादा 18 साल से कम की लड़किया sex Worker है। यहां पे हर उम्र हर धर्म की लड़किया उस काम से जुड़ी हुई है। जिसका चर्चा करते ही हमारा समाज मुह टेढ़ा कर लेता है। यानी इसे अच्छा नहीं कहता। वाबजूद इसके इस इलाको के लिए सरकार  तरफ अधिकार भी दिया हुआ है। इन्हे यहाँ से कोई हटा नहीं सकता।इस  लिए  बस्ती सालो से महजूद है।  उत्तरी कोलकाता के शोभाबाजार के नजदीक स्थित चितरंजन एवेन्यू में मौजूद इलाके को लोग कई सौ सालों से सोनागाछी के नाम से जानते आए हैं।

दरअसल किवंदतियां हैं कि एशिया के सबसे बड़े रेडलाइट का नाम एक मुस्लिम वली (संत) के नाम पर पड़ा है, 300 साल पहले जब कोलकाता बसा था तब हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित ये क्षेत्र व्यापार का बड़ा केंद्र था। इतिहासकार पीटी नायर की किताब ‘A history of Calcutta’s streets’ के अनुसार इस इलाके में सनाउल्लाह नाम का एक खूंखार डकैत अपनी मां के साथ रहा करता था। कुछ दिन बाद उस डकैत की मौत हो गई, एक दिन सनाउल्लाह की रोती हुई मां ने अपनी झोपड़ी से एक आवाज सुनी, झोपड़ी से आवाज आ रही थी, “मां तुम मत रो…मैं एक गाजी बन गया हूं, इस तरह निकला सनाउल्लाह से सोना गाजी का लेजेंड यानी कि किंवदंती।
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जल्द ही कथा आस-पास फैलने लगी, इस झोपड़ी में लोग पहुंचने लगे और इबादत करने लगे, यहां आकर कथित रूप से लोग बीमारियों से चंगे होने लगे, कहते हैं लोगों को यहां रुहानी एहसास होता था, इस तरह से कालांतर में किंवदंतियों में डकैत सनाउल्लाह को कथित रूप से संतत्व प्राप्त हुआ। इतिहासकार नायर कहते हैं कि सनाउल्लाह की मां ने अपने बेटे की याद में यहां एक सुंदर मस्जिद बनवा दी, इसे सोना गाजी के मस्जिद के नाम से जाना जाने लगा, कुछ दिन के बाद सनाउल्लाह की मां की मौत हो गई, इसके बाद इस मस्जिद की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा और धीर-धीरे लंबे कालखंड के बाद ये मस्जिद पूरी तरह से गायब हो गई, इस मस्जिद की वजह से पड़ोस के इलाके का नाम मस्जिद बाड़ी पड़ा, जबकि सनाउल्लाह गाजी बदलकर सोना गाजी हुआ और फिर बदलते-बदलते सोनागाछी हो गया।

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हालांकि सोनागाछी का प्रारंभिक इतिहास नहीं मिलता है, इस बात की भी सही जानकारी नहीं है कि कैसे सोनागाछी एक रेडलाइट एरिया में बदल गया, लेकिन कोलकाता शहर पर पिछले 30 सालों से लिखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार उन परिस्थितियों की ओर इशारा करते हैं जिससे यहां देह व्यापार पनपा है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार सोनागाछी ओल्ड पिलग्रिम रोड पर है जिसे अब रबींद्र सारणी के नाम से जाना जाता है, ये इलाका बड़े बाजारों का केंद्र रहा है, अंग्रेजों के यहां आने से पहले भी यहां व्यावसायिक गतिविधियां होती थीं, व्यापारी पानी के जहाज से आते थे, इनमें पुर्तगाल और अर्मेनिया के तिजारती प्रमुख थे, यहां मजदूर काम करते थे और लोगों की भीड़ जमा होती थी।

पत्रकार की माने तो कोई भी जगह बड़ी संख्या में व्यापारी/सैलानी आते हैं, जहां रुपया पैसा, माल असबाब पैदा होता है, जो व्यवसाय का बड़ा केंद्र है वहां रेड लाइट एरिया का पनपना बहुत आसान है, कभी सोनागाछी के देह व्यापार को नामी बंगाली परिवार चलाते थे, आज इन जर्जर कोठों को किराए पर दिया जाता है, यहां सनाउल्लाह की दरगाह आज भी है, ये कई बार टूटी और कई बार इसकी मरम्मत की गई, दुर्भाग्यवश इस दरगाह पर सनाउल्लाह की मौत की तारीख नहीं लिखी हुई है।

ये इलाका कोलकाता जिले के श्यामपुकुर विधानसभा सीट में आता है, हालांकि साल भर से चल रहे कोरोना के कहर ने सोनागाछी की रंगत फीकी कर दी है, चुनाव में यहां थोड़ी हलचल बढ़ी है,  सोनागाछी की बस्ती चुनाव और देश-दुनिया के दूसरे घटनाक्रम से इतर अपनी लय में चलती जा रही है, यहां कई सालों से हर शाम रौशन होती आ रही है।


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